Tuesday, September 2, 2014

आपका भाग और गोमेद



1.आपका भाग्य और गोमेद, लहसुनियां, राहू व केतु रत्न..
हमारे जीवन में नौ रत्नों का बहुत महत्व है. इनको धारण करने से हम अपने भाग्य के रास्ते की बाधा को काफी हद तक दूर करने में सक्षम हो सकते है.हमारी जन्म राशि और लग्न, अपने अन्दर सभी तरह के गुण-दोषों को लिए हुये है, जैसे आयु से सम्बंधित, स्वास्थ्य से इसका गहरा संबंध है.धन का यह प्रतिनिधित्व करती है. यश प्राप्ति में सहायक व काम धंधे की परिचायक, हमारा आचार-व्यवहार तथा विचारों का आदान प्रदान, इन सभी व्यापक गुणों की दृष्टि में रखते हुये हमें राशि(लग्न) से सम्बंधित रत्न धारण करना चाहिए राशि से सम्बंधित रत्न को मुख्य रत्न कहते है. कुछ रत्न ऐसे है, जो हमारे कष्टों का निवारण करते है. और कुछ रत्न ऐसे है, जो हमे कष्ट पंहुचाते है. यह जान लेना अति आवश्यक है कि आप जिस रत्न को धारण करने जा रहे है, कंहीं वह आपके लिए कष्टकारी तो नहीं? हम आपको सभी बारह राशियों(लग्न) के रत्नों के बारे में जानकारी देंगे कि कौन व्यक्ति अपनी राशि व लग्न के अनुसार कौन कौन से रत्न धारण कर सकता है.
गोमेद और लहसुनिया (राहू एवं केतु रत्न )
गोमेद और लहसुनिया के रत्न को अपनी कुण्डली किसी विद्वान ज्योतिषी को दिखा कर परामर्श लेकर धारण करना अनिवार्य होता है. या इनकी दशाएँ आने पर परामर्श से पहन सकते है. क्योंकि यह दोनों छाया ग्रह के रूप में माने जाते है. वैसे राहू का गोमेद है तथा केतु का रत्न लहसुनियां है राहू ग्रह शनि की प्रवृति रखता है. और केतु ग्रह मंगल की प्रवृति के समान होता है. यह जरूरी नहीं कि यह दोनों कष्टकारी फल दें, शुभ फल भी प्राप्त हो सकते है. यह दोनों रत्न कोई भी और किसी भी राशि का व्यक्ति परामर्श कर के धारण कर सकता है. और उसे लाभ भी होगा.............
Pt. krishan kumar bijlwan.
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